चार श्रेणियों में होगा कचरे का पृथक्करण, 657 नए वाहन खरीदे जा रहे; करीब 480 ई-वाहन शामिल
देहरादून। उत्तराखंड में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों के स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। बुधवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नए नियमों और प्रदेश में चल रही तैयारियों की जानकारी दी।
डॉ. धकाते ने बताया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 एक अप्रैल 2026 से देशभर में लागू हैं। नए नियमों में कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ सर्कुलर इकोनॉमी, स्रोत पर कचरा पृथक्करण, रिसाइक्लिंग और संसाधनों के पुनः उपयोग पर विशेष जोर दिया गया है। केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित नियमों में स्रोत पर चार श्रेणियों में कचरा अलग करना अनिवार्य किया गया है।
चार श्रेणियों में होगा कचरा पृथक्करण
डॉ. धकाते ने बताया कि वर्ष 2016 के नियमों में कचरा पृथक्करण की तीन श्रेणियां थीं, जबकि नए नियमों में इसे बढ़ाकर चार श्रेणियां किया गया है। इनमें गीला कचरा, सूखा कचरा, सैनिटरी कचरा और विशेष देखभाल वाला कचरा शामिल हैं।
नए नियमों के तहत बड़े कचरा उत्पादकों की जिम्मेदारियां भी निर्धारित की गई हैं। 2,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्रफल, प्रतिदिन 40 हजार लीटर से अधिक जल खपत अथवा प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक ठोस कचरा उत्पादन करने वाले प्रतिष्ठानों में से कोई एक मानक पूरा करने वाला संस्थान बल्क वेस्ट जनरेटर की श्रेणी में आएगा। ऐसे संस्थानों के पंजीकरण के साथ कचरे के प्रसंस्करण और रिसाइक्लिंग की जिम्मेदारी भी निर्धारित की गई है।
हर जिले में विशेष सेल, दिसंबर तक लिगेसी वेस्ट निस्तारण का लक्ष्य
डॉ. धकाते ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के 19 फरवरी 2026 के निर्देशों के क्रम में प्रदेश के प्रत्येक जनपद में डिस्ट्रिक्ट स्पेशल सेल गठित किए गए हैं। इन सेल के माध्यम से शहरी और ग्रामीण स्थानीय निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, डंपिंग साइट तथा लिगेसी वेस्ट के निस्तारण की लगातार निगरानी की जा रही है।
राज्य में लिगेसी वेस्ट के निस्तारण को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार प्रदेश में वर्तमान में लगभग शत-प्रतिशत डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण किया जा रहा है।
चार श्रेणियों में कचरा अलग-अलग एकत्र करने की व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए करीब 500 कचरा संग्रहण वाहनों में चार कम्पार्टमेंट की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही डिजिटल व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया गया है, जिससे कचरा संग्रहण वाहनों की निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी। नए केंद्रीय नियम भी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की प्रक्रिया की ऑनलाइन ट्रैकिंग और निगरानी पर जोर देते हैं।
रोज 1,930 मीट्रिक टन कचरा, 1,800 टन का प्रसंस्करण
प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि उत्तराखंड में प्रतिदिन करीब 1,930 मीट्रिक टन ठोस कचरा उत्पन्न हो रहा है, जबकि लगभग 1,800 मीट्रिक टन कचरे का प्रतिदिन प्रसंस्करण किया जा रहा है। प्लास्टिक कचरे का भी अलग से प्रसंस्करण किया जा रहा है।
कचरा संग्रहण व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 657 नए वाहन खरीदे जा रहे हैं, जिनमें करीब 480 ई-वाहन शामिल हैं। राज्य में वर्तमान में 22 इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट, लगभग 50 मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी और 600 से अधिक वेस्ट कम्पोस्टर संचालित किए जा रहे हैं।
आमजन की भागीदारी पर जोर
अधिकारियों ने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए नगरीय निकायों, ग्राम पंचायतों, जिला प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और आमजन की सामूहिक भागीदारी जरूरी है।
नए नियमों में कचरे को स्रोत पर अलग करने से लेकर उसके संग्रहण, परिवहन, प्रसंस्करण और निस्तारण तक पूरी व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और वैज्ञानिक बनाने पर जोर दिया गया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पीआईबी देहरादून के सहायक निदेशक संजीव सुन्दिरयाल और शहरी विकास विभाग के अपर निदेशक प्रवीण कुमार भी मौजूद रहे।