अमेठी। उत्तर प्रदेश के अमेठी जनपद स्थित मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय में शुक्रवार को विजिलेंस (सतर्कता अधिष्ठान) की लखनऊ/अयोध्या यूनिट की टीम ने एक बड़ी गोपनीय कार्रवाई करते हुए भ्रष्टाचार के बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है. विजिलेंस की टीम ने सीएमओ दफ्तर में तैनात पटल बाबू संजय मिश्रा को एक पीड़ित से विधिक कार्य के एवज में तय की गई रिश्वत की राशि लेते हुए रंगेहाथों गिरफ्तार कर लिया. इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई से स्वास्थ्य विभाग के प्रशासनिक गलियारों के भीतर हड़कंप की स्थिति पैदा हो गई. विजिलेंस के अधिकारियों ने गिरफ्तारी के तुरंत बाद आरोपी बाबू के हाथ धुलवाए, जिसमें केमिकल के कारण पानी का रंग गुलाबी हो गया, जो विधिक साक्ष्य के रूप में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

विभागीय सूत्रों से प्राप्त विवरण के अनुसार, पीड़ित ने विजिलेंस के एंटी-करप्शन हेल्प डेस्क पर शिकायत दर्ज कराई थी कि सीएमओ कार्यालय का बाबू संजय मिश्रा उसका आधिकारिक कार्य अटका कर लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था और बिना घूस की रकम लिए फाइल आगे बढ़ाने से साफ मना कर रहा था. शिकायत की सत्यता जांचने के बाद विजिलेंस टीम ने सुनियोजित तरीके से जाल बिछाया. शुक्रवार को जैसे ही पीड़ित ने बाबू संजय मिश्रा को उसके केबिन के भीतर घूस के पैसे थमाए, वैसे ही सादे कपड़ों में पहले से तैनात विजिलेंस के इंस्पेक्टरों ने उसे मौके पर ही दबोच लिया. टीम आरोपी को अभिरक्षा में लेकर सीधे मुसाफिरखाना कोतवाली पहुंची, जहां उसे लॉकअप में रखकर बंद कमरे में कड़ाई से पूछताछ की जा रही है.

मुसाफिरखाना कोतवाली प्रभारी ने बताया कि विजिलेंस टीम के उपाधीक्षक (DSP) की लिखित तहरीर के आधार पर आरोपी बाबू संजय मिश्रा के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) की सुसंगत और गैर-जमानती धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) पंजीकृत कर ली गई है. विजिलेंस की एक अन्य तकनीकी विंग आरोपी बाबू के सेवा अभिलेखों, बैंक खातों के लेन-देन और उसकी आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) के स्रोतों को खंगालने की कानूनी कसरत शुरू कर चुकी है. मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए आरोपी बाबू को सेवा से तत्काल निलंबित करने और पूरे पटल की आंतरिक ऑडिट कराने की संस्तुति शासन को प्रेषित कर दी है.

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