​विधि संवाददाता, पीलीभीत। अपर सत्र न्यायाधीश महेंद्र श्रीवास्तव के न्यायालय ने विवाहिता की गला काटकर हत्या करने के एक गंभीर मामले में आज अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायालय ने मामले की गहन सुनवाई करने के बाद दोनों नामजद आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह असफल रहा, जिसके चलते दोनों को दोषमुक्त करने का आदेश पारित किया गया।
​अभियोजन कथानक के अनुसार, यह पूरा मामला थाना पूरनपुर के मोहल्ला साहूकारा से जुड़ा है, जहाँ के निवासी मोहम्मद हनीफ ने पुलिस को तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वादी के मुताबिक, उसकी करीब 50 वर्षीय बहन मैराज बानो का विवाह वार्ड नंबर एक, मोहल्ला साहूकारा (लाइन पार), पूरनपुर के निवासी भुल्लन खां के साथ हुआ था। भुल्लन खां की यह तीसरी शादी थी और उसने विवाह के समय 18 लाख रुपये मूल्य की संपत्ति मैराज बानो के नाम की थी। बाद में मैराज बानो ने उस संपत्ति को बेचकर प्राप्त रकम अपने निजी खाते में जमा करा ली थी। इसी बात को लेकर पति भुल्लन खां नाराज रहता था और मैराज बानो के साथ गाली-गलौज व मारपीट करते हुए जान से मारने की धमकी देता था, जिसके बाद मायके और परिवार के लोगों ने बीच में पड़कर उनका आपस में समझौता करा दिया था।
​घटना वाले दिन यानी 6 जुलाई 2023 की सुबह करीब 8:30 बजे ग्रामीणों ने वादी को सूचना दी कि इसी 18 लाख रुपये के विवाद को लेकर भुल्लन खां ने मैराज बानो की गला काटकर बेरहमी से हत्या कर दी है। वादी ने तहरीर में भुल्लन खां के दामाद नईम और रहीस पर भी हत्या की साजिश में शामिल होने का शक जताया था। पुलिस ने मामले की तफ्तीश के बाद मुख्य आरोपी पति भुल्लन खां और दामाद नईम खां को दोषी पाते हुए उनके खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान जहाँ अभियोजन पक्ष ने आरोपियों को सजा दिलाने के लिए कई गवाह पेश किए, वहीं आरोपियों ने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया। अंततः, न्यायालय ने अभियोजन पक्ष की दलीलों और बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता एम. एम. ए. कादरी द्वारा प्रस्तुत प्रभावी तर्कों को सुना। पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का बारीकी से अवलोकन करने के बाद, अदालत ने पाया कि आरोपियों के खिलाफ अपराध सिद्ध करने के लिए पर्याप्त और ठोस सबूत मौजूद नहीं हैं, जिसके आधार पर न्यायालय ने दोनों आरोपियों को बाइज्जत दोषमुक्त कर दिया।

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