मिर्जापुर | उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) ने वन्यजीवों के शिकार और उनकी बहुमूल्य हड्डियों व दांतों की अंतरराष्ट्रीय तस्करी करने वाले एक बेहद खतरनाक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। एसटीएफ की टीम ने मिर्जापुर जनपद के लालगंज वन रेंज के अंतर्गत आने वाले जिगना क्षेत्र से घेराबंदी कर तीन शातिर तस्करों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने तस्करों के कब्जे से करोड़ों रुपये मूल्य के हाथी दांत और अन्य अवशेष बरामद किए हैं।

करोड़ों की अंतरराष्ट्रीय खेप: 2 हाथी दांत और जबड़ा बरामद

एसटीएफ मुख्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, पकड़े गए तस्करों के पास से वन्यजीव तस्करी की एक बड़ी और दुर्लभ खेप जब्त की गई है। बरामद सामान में निम्नलिखित मुख्य अवशेष शामिल हैं:

  • 02 भारी और पूर्ण रूप से विकसित हाथी दांत
  • 01 हाथी का पूरा साबुत जबड़ा

अंतरराष्ट्रीय ब्लैक मार्केट और वन्यजीव तस्करी के बाजारों में इन बरामद अंगों की कीमत करोड़ों रुपये आंकी जा रही है। इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से बेशकीमती सजावटी सामान, दवाइयां और प्राचीन कलाकृतियों को बनाने में किया जाता है।

लंबे समय से जंगलों में हाथियों का शिकार कर रहा था गिरोह

एसटीएफ की शुरुआती पूछताछ में गिरफ्तार तस्करों ने बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। आरोपियों ने कुबूल किया है कि वे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और आस-पास के सीमावर्ती जंगलों में लंबे समय से सक्रिय थे। यह गिरोह जंगलों में अवैध रूप से हाथियों और अन्य संरक्षित वन्यजीवों को निशाना बनाता था। हाथियों को जहर देकर या गोली मारकर उनके दांत और जबड़े काट लिए जाते थे और फिर उन्हें दिल्ली, कोलकाता व विदेशों में बैठे बड़े तस्करों को ऊंची कीमतों पर सप्लाई किया जाता था।

जिगना क्षेत्र में बिछाया गया था एसटीएफ का जाल

एसटीएफ को पिछले कई दिनों से मिर्जापुर और विंध्याचल के जंगलों के आस-पास वन्यजीवों के अंगों की डील होने की गुप्त सूचना मिल रही थी। इसी इनपुट के आधार पर एसटीएफ की एक विशेष टीम ने लालगंज वन रेंज के जिगना क्षेत्र में जाल बिछाया। जैसे ही तीनों तस्कर हाथी दांत की डिलीवरी देने के लिए पहुंचे, टीम ने उन्हें चारों तरफ से घेरकर दबोच लिया। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Wildlife Protection Act) की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर वन विभाग और स्थानीय पुलिस आगे की कानूनी कार्रवाई में जुट गई है।


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