​पीलीभीत। साढ़े तीन साल से मलेशिया में बंधक बनकर उत्पीड़न का शिकार हो रहे जनपद के तीन युवक जल्द ही अपने वतन वापस लौटेंगे। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद की मजबूत पैरवी और प्रयास के बाद इन युवकों की सुरक्षित घर वापसी का रास्ता साफ हो गया है। आगामी 6 जुलाई को मलेशिया से उनके पासपोर्ट और वापसी के टिकट उपलब्ध करा दिए जाएंगे, जिसके बाद ये युवक केरल होते हुए आगामी 8 जुलाई तक अपने पैतृक घर पहुंच जाएंगे।
​पूरा मामला जनपद के अलग-अलग गांवों से जुड़ा है, जहाँ जहानाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम खमरिया पुल निवासी तारकेश्वर (पुत्र भजन लाल) व साजन (पुत्र रामप्रसाद) और गजरौला थाना क्षेत्र के ग्राम पिपरिया निवासी जितेंद्र कुमार (पुत्र राम बहादुर) को साढ़े तीन वर्ष पूर्व विदेश में अच्छी नौकरी का झांसा दिया गया था। एजेंट विजय ने इन तीनों युवकों से डेढ़-डेढ़ लाख रुपये ऐंठकर उन्हें मलेशिया भेज दिया। वहाँ पहुँचने पर युवकों को कोई नौकरी नहीं मिली, बल्कि उन्हें बंधुआ मजदूर बनाकर जबरन काम कराया जाने लगा और उनका भारी उत्पीड़न किया गया। जब परिजनों को विदेश में बच्चों के साथ हो रही इस क्रूरता की जानकारी हुई, तो उन्होंने एजेंट से संपर्क किया। लेकिन एजेंट ने साफ पल्ला झाड़ते हुए मदद करने से इनकार कर दिया। इसके बाद बेबस परिजन अपने बच्चों की वापसी के लिए लगातार भटकते रहे।
​इस मानवीय त्रासदी की जानकारी जब किसान नेता देव स्वरूप पटेल को हुई, तो उन्होंने तुरंत पीड़ित परिवारों की मदद का बीड़ा उठाया। उन्होंने मलेशिया में फंसे तीनों युवकों के सभी दस्तावेज और विवरण जुटाकर केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद को उपलब्ध कराए और उनसे जल्द घर वापसी की गुहार लगाई। केंद्रीय मंत्री ने परिजनों की इस गहरी पीड़ा को संवेदनशीलता से लेते हुए तत्काल भारत सरकार के विदेश मंत्रालय एवं गृह मंत्रालय के उच्च अधिकारियों से उच्च स्तरीय वार्ता की। उनके कड़े निर्देशों के बाद राजनयिक स्तर पर तेजी से कार्रवाई हुई और अब तीनों युवकों की सुरक्षित वतन वापसी सुनिश्चित हो गई है।
​इस बड़ी सफलता पर किसान नेता देव स्वरूप पटेल ने केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे पूर्व में भी किर्गिस्तान और रूस में फंसे स्थानीय युवकों की केंद्रीय मंत्री के सहयोग से सुरक्षित घर वापसी करा चुके हैं। उन्होंने आमजन और युवाओं से बेहद भावुक अपील करते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति नौकरी के लिए विदेश जाते समय केवल और केवल सरकारी व्यवस्था व अधिकृत माध्यमों का ही उपयोग करे। किसी भी तरह के अवैध प्राइवेट एजेंटों के झांसे में न आएं, ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी अनहोनी और मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न से बचा जा सके।

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