पीलीभीत। भारत-नेपाल सीमा पर अवैध वन्यजीव व्यापार और तस्करी की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की 49वीं वाहिनी की नौजलिया पोस्ट पर एक दिवसीय ‘अवैध वन्यजीव व्यापार’ ओरिएंटेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सीमा सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के तालमेल को मजबूत करने वाले इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुल 34 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिसमें एसएसबी के 31 जवान (28 पुरुष व 3 महिला कर्मी) और वन विभाग के 3 पुरुष कर्मचारी शामिल रहे।
कार्यक्रम के दौरान वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) की तकनीकी टीम ने सीमा रक्षकों को वन्यजीव अपराधों से निपटने के व्यावहारिक गुर सिखाए। तकनीकी सत्र के दौरान डब्ल्यूटीआई विशेषज्ञों ने अवैध वन्यजीव व्यापार के वैश्विक व क्षेत्रीय रुझानों, तस्करी की जाने वाली वन्यजीव सामग्रियों और अंगों की पहचान करने के तरीकों तथा तस्करों द्वारा अपनाए जाने वाले परिवहन के तौर-तरीकों (मोडस ऑपेरेंडी) पर विस्तार से जानकारी दी। सत्र में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि संवेदनशील भारत-नेपाल सीमा पर तैनात फ्रंटलाइन सुरक्षाकर्मी किस प्रकार त्वरित निगरानी और सूझबूझ से वन्यजीव तस्करों के नेटवर्क को ध्वस्त कर सकते हैं।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान एसएसबी की असिस्टेंट कमांडेंट पूनम मीणा ने चर्चा में बेहद सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने साझा किया कि लगभग छह महीने पहले उन्होंने भोपाल में वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (WCCB) द्वारा आयोजित अवैध वन्यजीव व्यापार संबंधी एक विशेष प्रशिक्षण में भाग लिया था। पूर्व में मिले इस बेहतरीन एक्स्पोज़र के कारण उन्होंने सत्र के तकनीकी पहलुओं को गहराई से समझा और चर्चा को आगे बढ़ाया। उन्होंने सीमाई क्षेत्रों में वन्यजीवों के संरक्षण तथा संबंधित अपराधों की रोकथाम के प्रति अपनी गहरी रुचि और प्रतिबद्धता भी व्यक्त की।