पीलीभीत। उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग की नीतियों और दरों में बढ़ोतरी के खिलाफ उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने मोर्चा खोल दिया है। संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष अनिल महेंद्रू के नेतृत्व में व्यापारियों और उद्योगपतियों के एक बड़े प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक 5-सूत्रीय मांग पत्र अपर जिलाधिकारी (एडीएम) रोशनी यादव को सौंपा। प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने बिजली विभाग पर तानाशाही रवैया अपनाने और उपभोक्ताओं के आर्थिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए जल्द से जल्द सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है।
इस मौके पर संगठन के जिला अध्यक्ष एम.ए. जिलानी ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बढ़ती दरों के कारण राज्य के उद्योग और व्यापार पड़ोसी राज्यों में पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं, जिससे प्रदेश सरकार को भारी राजस्व का नुकसान उठाना पड़ेगा। वहीं, नगर अध्यक्ष रणवीर पाठक ने मुख्यमंत्री को भेजे गए मांग पत्र के मुख्य बिंदुओं को साझा किया। उन्होंने छोटे उपभोक्ताओं के लिए बिजली मीटर के दाम 750 रुपये से बढ़ाकर सीधे 5300 रुपये किए जाने को अनुचित बताया और प्रदेश के 47 लाख उपभोक्ताओं का बिना किसी पूर्व सूचना के एकतरफा लोड बढ़ाए जाने तथा उनसे अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी वसूलने के फैसले को तत्काल निरस्त करने की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल ने बिजली बिलों में जबरन जोड़े जा रहे 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार (फ्यूल सरचार्ज) को भी तुरंत समाप्त करने की मांग उठाई है। इसके साथ ही युवा जिला अध्यक्ष शैली शर्मा ने जिले में हो रही भीषण और अघोषित बिजली कटौती पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि अनियमित कटौती के कारण स्थानीय कारखाने और दुकानें ठप होने की कगार पर हैं। उद्योगों को सुचारू रूप से चलाने के लिए व्यापारियों ने 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।
व्यापारियों की समस्याओं को गंभीरता से सुनने के बाद अपर जिलाधिकारी रोशनी यादव ने आश्वासन दिया कि इस जनहित से जुड़े मामले और 5-सूत्रीय मांग पत्र को प्राथमिकता के आधार पर आज ही मुख्यमंत्री कार्यालय, लखनऊ भेज दिया जाएगा। इस विरोध प्रदर्शन में संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों सहित अनिल महेंद्रू, एम.ए. जिलानी, रणवीर पाठक, शैली शर्मा, सपना यादव, नाहिद ख़ान, राशिद अंसारी, ऋषभ सिंह, अतुल जायसवाल, संदीप सक्सेना और शोभनीय सिंह सहित सैकड़ों स्थानीय व्यापारी उपस्थित रहे, जिन्होंने मांगें पूरी होने तक अपना संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।