पीलीभीत। हर वर्ष सितंबर माह के प्रथम शनिवार को मनाए जाने वाले ‘अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस’ के अवसर पर पीलीभीत टाइगर रिजर्व (PTR) में गिद्धों के संरक्षण और उनकी भूमिका पर विशेष प्रकाश डाला गया है। इस वर्ष यह दिवस 5 सितंबर को मनाया जा रहा है। पर्यावरण संतुलन और प्रकृति को स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले गिद्ध पीलीभीत की समृद्ध जैव विविधता का एक अभिन्न अंग हैं।
पीलीभीत टाइगर रिजर्व और इसके आसपास के क्षेत्रों में गिद्धों की कुल सात प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की गई है, जिनमें से चार प्रजातियां स्थानीय हैं और तीन प्रजातियां शरद ऋतु में प्रवास के दौरान यहां आती हैं। प्रवासी गिद्ध सामान्यतः नवंबर से मई माह तक पीलीभीत के जंगलों व घास के मैदानों में देखे जाते हैं। टरक्वाइज वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन सोसाइटी के अध्यक्ष अख्तर मियां खान के अनुसार, टाइगर रिजर्व के उत्तरी हिस्से के घास के मैदानों में गिद्धों के लिए अनुकूल माहौल और पर्याप्त भोजन उपलब्ध है। पिछले कई वर्षों से क्षेत्र में गिद्धों की संख्या लगभग दो सौ के आसपास बनी हुई है। यहां मुख्य रूप से इजिप्शियन वल्चर, व्हाइट-रम्प्ड वल्चर, हिमालयन वल्चर और यूरेशियन ग्रिफॉन वल्चर पाए जाते हैं। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी (DFO) मनीष सिंह ने बताया कि रिजर्व क्षेत्र में लगभग 30 से 40 हिमालयन वल्चर प्रजाति के गिद्ध विशेष रूप से देखे गए हैं।
प्रकृति के ‘सफाईकर्मी’ कहे जाने वाले गिद्ध मृत पशुओं के अवशेषों को निस्तारित कर पर्यावरण को घातक संक्रमण और बीमारियों से बचाते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि गिद्धों का संरक्षण पूरे पारिस्थितिकी तंत्र की सेहत के लिए अनिवार्य है। पीलीभीत में 200 गिद्धों की मौजूदगी एक शुभ संकेत है, लेकिन इनके अस्तित्व को बनाए रखने के लिए सुरक्षित भोजन, विषैले पदार्थों से बचाव और निरंतर निगरानी की आवश्यकता है।
वन एवं वन्य जीव प्रभाग के प्रभावी निदेशक भारत कुमार डीके ने बताया कि गत वर्ष कराई गई गणना के अनुसार वन एवं वन्य जीव प्रभागीय क्षेत्र में 30 से 40 गिद्ध देखे गए थे। उन्होंने बताया कि गिद्धों को बचाने और जन-जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से एक विशेष वीडियो भी जारी किया गया है। इस वीडियो को जनपद के सभी विद्यालयों में विद्यार्थियों को दिखाया जाएगा, जिससे भावी पीढ़ी को पर्यावरण संतुलन में गिद्धों की महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति जागरूक किया जा सके। अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस के अवसर पर वन विभाग और पर्यावरणविदों ने इन आसमान के पहरियों के संरक्षण का संकल्प दोहराया है।