पीलीभीत। दुनिया के जाने-माने मैनेजमेंट गुरु टीडी नैनवाल ने कहा है कि उचित प्रबंधन के पांच सिद्धांतों को अपनाने से न केवल कार्यप्रणाली में सुधार होता है, बल्कि परिणाम भी अपेक्षा से अधिक बेहतर और सकारात्मक रूप से सामने आने लगते हैं। मैनेजमेंट गुरु टीडी नैनवाल गुरुवार को पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी सभागार में दोनों प्रभागों के वन कर्मचारियों को एक विशेष प्रबंधन कार्यशाला के दौरान संबोधित कर रहे थे।
वैश्विक अनुभव और विशिष्ट पृष्ठभूमि
लगभग 20 वर्षों तक अमेरिका, नीदरलैंड और सिंगापुर जैसे देशों में उच्च स्तरीय प्रबंधन का कार्य संभाल चुके टीडी नैनवाल ने अपने करियर की शुरुआत ईशर (Eicher) कंपनी से की थी। इसके पश्चात उन्होंने दूतावास स्तर पर प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाई तथा अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपतियों—बिल क्लिंटन, सीनियर व जूनियर जॉर्ज बुश तथा बराक ओबामा के साथ भी कार्य करने का गौरव प्राप्त किया है। शासकीय सेवाओं से सेवानिवृत्ति के पश्चात वर्तमान में वे एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मैनेजमेंट गुरु के रूप में पूरी दुनिया में विख्यात हैं।
प्रबंधन के पांच ‘पी’ सिद्धांत
कार्यशाला को संबोधित करते हुए उन्होंने प्रबंधन के पांच सबसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनके अनुसार, ये पांच सिद्धांत ‘पी’ (5 Ps)—पीपल प्रेस्टीज, प्रॉफिट , पार्टिसिपेशन और प्रिंसिपल हैं, जो किसी भी संगठन या विभाग की रीढ़ होते हैं। उन्होंने अमेरिका की कार्यसंस्कृति का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां ‘हायर द एटीट्यूड, ट्रेन द स्किल’ (उच्च दृष्टिकोण वाले को चुनना और कौशल का प्रशिक्षण देना) की नीति को सर्वोपरि माना जाता है।
सीखने की प्रवृत्ति और आत्म-अनुशासन का महत्व
श्री नैनवाल ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि व्यक्ति को हमेशा अपने व्यवहार और सकारात्मक दृष्टिकोण से सीखते रहना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस दिन मनुष्य के भीतर सीखने की प्रवृत्ति समाप्त हो जाती है, उसी दिन से उसका करियर ग्राफ नीचे गिरने लगता है। इसके साथ ही, कार्य के प्रति सच्ची निष्ठा और आत्म-अनुशासन को उन्होंने सफलता का सबसे बड़ा आधार बताया।

भविष्य का विजन और वर्तमान की महत्ता
मैनेजमेंट गुरु ने उपस्थित अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि हमेशा भविष्य का एक स्पष्ट विजन होना चाहिए, अपने अतीत को कभी नहीं भूलना चाहिए, और वर्तमान को पूरी तरह प्रभावी रूप से अपने कार्य के प्रति समर्पित कर देना चाहिए। उनका यह भी मानना था कि हर समस्या अपने साथ एक समाधान लेकर आती है और दुनिया के सभी बड़े उद्यम केवल कठोर परिश्रम के बल पर ही संभव होते हैं।

स्वागत संबोधन एवं गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति
कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए पीलीभीत टाइगर रिजर्व के प्रभागीय वनाधिकारी मनीष सिंह ने कहा कि यह अत्यंत सौभाग्य का विषय है कि दुनिया के श्रेष्ठ मैनेजमेंट गुरु ने अपना बहुमूल्य समय पीलीभीत टाइगर रिजर्व को दिया और यहां के वन कर्मियों को आधुनिक प्रबंधन के गुर सिखाए।
इस महत्वपूर्ण कार्यशाला में एसडीओ माला रुद्र प्रताप सिंह, एसडीओ पूरनपुर रमेश चौहान, वन क्षेत्राधिकारी महोफ सहेंन्द्र सिंह यादव, विश्व प्रकृति निधि के वरिष्ठ परियोजना अधिकारी नरेश कुमार तथा वन्य जीव विशेषज्ञ डॉ. अमिताभ अग्निहोत्री सहित दोनों प्रभागों के तमाम वन कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यशाला के अंत में वन क्षेत्राधिकारी माला रोबिन सिंह ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।