रुद्रपुर। पड़ोस में रहने वाली नाबालिग बच्ची को शादी का झांसा देकर अपने साथ ले जाने के मामले में विशेष सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) अनीता गुंज्याल की अदालत ने अभियुक्त नईम को दोषी ठहराया है। अदालत ने उसे आईपीसी की धारा 363 और 366 तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 16/17 के तहत तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी। इसके अलावा अदालत ने कुल 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
मामला जून 2021 का है। अभियोजन के अनुसार रुद्रपुर के पहाड़गंज क्षेत्र में रहने वाले नईम पर आरोप था कि उसने पड़ोस में रहने वाली नाबालिग बच्ची को शादी का झांसा देकर अपने साथ ले गया था। 11 जून को बच्ची की मां के घर पर मौजूद नहीं होने के दौरान आरोपी ने उसे फोन कर सितारगंज बुलाया। आरोप है कि वहां से वह बच्ची को बाइक पर बैठाकर उत्तर प्रदेश के पीलीभीत स्थित अपने गांव भंगा ले गया।
बच्ची के घर से गायब होने के बाद उसकी मां ने रुद्रपुर कोतवाली में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस के अनुसार, बच्ची को आरोपी के परिजन 13 जून को वापस छोड़ गए थे। इसके बाद पुलिस ने 21 जून को नईम को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से बच्ची के अपनी इच्छा से जाने का तर्क रखा गया। वहीं अभियोजन पक्ष ने स्कूल अभिलेखों के आधार पर अदालत में उसकी उम्र घटना के समय 9 वर्ष 11 माह छह दिन होने का प्रमाण प्रस्तुत किया।
अदालत ने माना कि इतनी कम उम्र की बच्ची अपने हित-अहित का निर्णय लेने की स्थिति में नहीं होती और उसकी सहमति को इस मामले में कानूनी आधार नहीं माना जा सकता। अदालत ने आरोपी को संबंधित धाराओं में दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई।
अदालत ने आईपीसी की धारा 363 के तहत पांच हजार रुपये, धारा 366 के तहत 10 हजार रुपये और पॉक्सो एक्ट के तहत पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इसके साथ ही पीड़िता के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार को एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया गया है।