विधि संवाददाता, पीलीभीत। जनपद के शिक्षा विभाग में हुए करीब एक करोड़ रुपये से अधिक के बहुचर्चित वेतन घोटाले में न्यायालय से बड़ी खबर आई है। जनपद सत्र न्यायाधीश रविन्द्र कुमार की अदालत ने मामले की गंभीरता से सुनवाई करने के बाद, आरोपी बनाई गईं महाराष्ट्र की तरन्नुम फातिमा शेख और छत्तीसगढ़ की शमीम खान की अग्रिम जमानत याचिकाएं कुछ कड़े प्रतिबंधों और शर्तों के साथ स्वीकार कर ली हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक दो दर्जन से अधिक आरोपियों की नियमित और अग्रिम जमानत याचिकाएं मंजूर हो चुकी हैं, जबकि मुख्य आरोपी इलहाम उर रहमान शम्सी वर्तमान में उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) से मिली अग्रिम जमानत पर है।
​अभियोजन कथानक के अनुसार, इस पूरे घोटाले को लेकर तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) राजीव कुमार ने थाना कोतवाली में एक लिखित तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया था। तहरीर में आरोप लगाया गया था कि जनता टेक्निकल कॉलेज, बीसलपुर में कार्यरत इलहाम उर रहमान शम्सी पिछले कई वर्षों से जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय पीलीभीत में वेतन बिल और टोकन जनरेशन आदि का संवेदनशील कार्य देख रहा था। इसी दौरान उसने पद का दुरुपयोग करते हुए कूटरचित (फर्जी) तरीके से वेतन मद से कुल 1,01,95,135 रुपये (एक करोड़ एक लाख पंचांवे हजार एक सौ पैंतीस रुपये) की भारी-भरकम सरकारी धनराशि अपनी पत्नी अर्शी खातून के बैंक खाते में हस्तांतरित कर दी और सरकारी धन का खुलेआम गबन किया।
​इस गबन कांड की जांच के दौरान सह-आरोपी के रूप में सामने आईं अशर्फियां जमात खाना (जिला ठाणे, महाराष्ट्र) की निवासी तरन्नुम फातिमा शेख और इस्पात नगर रिसाली (भिलाई नगर, जिला दुर्ग, छत्तीसगढ़) की निवासी शमीम खान की ओर से जनपद सत्र न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की गई थी। याचिका पर सुनवाई के दौरान अभियोजन और बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने अपनी-अपनी दलीलें और कानूनी तर्क प्रस्तुत किए। जनपद सत्र न्यायाधीश रविन्द्र कुमार ने दोनों पक्षों की जिरह सुनने तथा पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का गहन अवलोकन करने के बाद दोनों महिलाओं की अग्रिम जमानत याचिकाएं सशर्त मंजूर करने का आदेश जारी किया।
​न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि अग्रिम जमानत अवधि के दौरान दोनों महिला आरोपियों को कुछ अनिवार्य शर्तों का पालन करना होगा। शर्तों के अनुसार, वे पुलिस विवेचना में पूर्ण रूप से सहयोग करेंगी और न्यायालय में प्रत्येक नियत तिथि पर स्वयं अथवा अपने अधिवक्ता के माध्यम से अनिवार्य रूप से उपस्थित होंगी। इसके अतिरिक्त, वे प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी व्यक्ति को कोई उत्प्रेरणा, धमकी या वचन नहीं देंगी, जिससे कि गवाहों को प्रभावित किया जा सके। न्यायालय ने यह भी निर्देश दिया है कि दोनों आरोपी सक्षम अदालत की पूर्व अनुमति के बिना भारत देश से बाहर नहीं जाएंगी और भविष्य में इस प्रकार के किसी भी अन्य वित्तीय या आपराधिक कृत्य में संलिप्त नहीं होंगी।

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