​विधि संवाददाता, पीलीभीत। सार्वजनिक पक्के रास्ते पर गड्ढा खोदकर राहगीरों की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न करने के एक बहुचर्चित मामले में न्यायालय का बड़ा फैसला सामने आया है। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायालय ने मामले की गंभीरता से सुनवाई करने के बाद दोनों नामजद आरोपियों को पर्याप्त साक्ष्य न होने के कारण बाइज्जत दोषमुक्त (बरी) कर दिया है। इसके साथ ही, न्यायालय ने अदालत का समय बर्बाद करने और झूठी गवाही देने के कृत्य को गंभीरता से लेते हुए, मुकदमा दर्ज कराने वाले वादी के खिलाफ ही अलग से प्रकीर्ण वाद (विविध वाद) दर्ज कर उसे कारण बताओ नोटिस जारी करने का कड़ा आदेश दिया है।
​अभियोजन कथानक के अनुसार, यह पूरा मामला थाना माधोटांडा क्षेत्र का है। यहाँ के निवासी वादी जितेंद्र कुमार ने माधोटांडा थाने में एक लिखित तहरीर देकर आरोप लगाया था कि ग्राम सेलहा (तहसील कलीनगर, पीलीभीत) को जाने वाला एकमात्र पक्का रास्ता है, जिससे पूरे गांव के लोग आवागमन करते हैं। तहरीर में कहा गया था कि 14 अक्टूबर 2022 की रात को ग्राम धुरिया पलिया निवासी वालजीत सिंह, सुखचैन सिंह, मंदीप सिंह और संदीप सिंह ने रात के अंधेरे में चोरी-छिपे उक्त पक्के रास्ते को खोदकर बड़ा गड्ढा बना दिया और सड़क को क्षतिग्रस्त कर दिया। इसी दौरान रात में बाइक से अपनी पत्नी रेनू के साथ घर वापस लौट रहे सुनील कुमार की मोटरसाइकिल अचानक उस गहरे गड्ढे में गिर गई, जिससे पति-पत्नी दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए और उनका इलाज जिला अस्पताल में चला। आरोप था कि जब ग्रामीणों ने रास्ता खोदने का विरोध किया, तो आरोपियों ने पूरे गांव को गालियां देते हुए रास्ता हमेशा के लिए बंद करने की धमकी दी।
​पुलिस ने मामले की तफ्तीश और विवेचना के बाद ग्राम धुरिया पलिया निवासी दो सगे भाइयों—वालजीत सिंह और सुखचैन सिंह को दोषी पाते हुए उनके विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था। न्यायालय में मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कई गवाहों को कटघरे में पेश किया गया। हालांकि, मामले में उस समय नया मोड़ आ गया जब खुद वादी मुकदमा जितेंद्र कुमार ने न्यायालय के समक्ष दिए गए अपने बयानों में पूर्व में दर्ज कराई गई घटना का समर्थन करने से साफ इनकार कर दिया और अपनी ही तहरीर से पलट गया।
​अदालत ने दोनों पक्षों की अंतिम जिरह सुनने, गवाहों के बयानों का विश्लेषण करने और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों का गहन अवलोकन करने के बाद यह पाया कि आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्ध करने के लिए पर्याप्त और ठोस सबूत मौजूद नहीं हैं, जिसके आधार पर वालजीत सिंह और सुखचैन सिंह को दोषमुक्त कर दिया गया। वहीं दूसरी ओर, अदालत में मुकरने और झूठी गवाही देकर न्यायिक प्रक्रिया को गुमराह करने के आरोप में वादी जितेंद्र कुमार के विरुद्ध सख्त रुख अपनाते हुए अलग से प्रकीर्ण वाद दर्ज करने व नोटिस जारी कर जवाब तलब करने का आदेश पारित किया गया है।

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