​पीलीभीत। स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं सम्बद्ध चिकित्सालय, पीलीभीत के चिकित्सकों ने अपनी विशेषज्ञता और त्वरित निर्णय क्षमता से एक बार फिर मानवता की सेवा में उत्कृष्ट उदाहरण पेश किया है। चिकित्सालय के अत्याधुनिक आईसीयू विभाग ने समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण उपचार के जरिए गंभीर रूप से अचेत अवस्था में लाई गई ७६ वर्षीय बुजुर्ग महिला को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल लिया है। कॉलेज की प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा के कुशल मार्गदर्शन में मिल रही ये आधुनिक चिकित्सा सेवाएं गंभीर मरीजों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही हैं।
​प्राप्त विवरण के अनुसार, गंभीर हालत में आपातकालीन वार्ड में लाई गई महिला का तत्काल सीटी स्कैन कराया गया, जिसमें उनके मस्तिष्क के बेहद संवेदनशील हिस्से ‘राइट थैलेमस’ (दाएं थैलेमस) में 16 \times 10 \text{ मिमी} का रक्तस्राव (ब्रेन हेमरेज) पाया गया। चूंकि थैलेमस शरीर की चेतना, संवेदना और गतिविधियों को नियंत्रित करता है, इसलिए इस हिस्से में ब्लीडिंग होने पर तत्काल इलाज न मिलने की स्थिति में मरीज की मौत या हमेशा के लिए विकलांगता का खतरा रहता है। इस जटिल चुनौती को देखते हुए आईसीयू प्रभारी डॉ. अरविंद एम के नेतृत्व में टीम ने वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. अमित कोहली के साथ परामर्श कर एक बहु-विषयक चिकित्सा पद्धति अपनाई। डॉक्टरों की टीम ने रक्तचाप पर नियंत्रण, न्यूरोप्रोटेक्शन (मस्तिष्क सुरक्षा) और सिर के भीतर बढ़ने वाले दबाव को नियंत्रित करने पर विशेष ध्यान दिया, जिसके बेहतरीन परिणाम सामने आए और महिला पूर्णतः होश में आ गई।
​होश में आने के बाद मरीज के शरीर का बायां हिस्सा पूरी तरह कमजोर (पैरालिसिस की स्थिति) हो गया था। इसके बाद आईसीयू की फिजियोथेरेपी टीम ने बिना समय गंवाए बेडसाइड मोबिलाइजेशन और एक्सरसाइज शुरू कराई। डॉक्टरों की अथक मेहनत और सटीक थेरेपी के चलते डिस्चार्ज होने तक महिला स्वयं बैठने, खड़े होने और बातचीत करने में पूरी तरह सक्षम हो गई। इसके अलावा जांच में मरीज के खून में कोलेस्ट्रॉल की अत्यधिक मात्रा (डिस्लिपिडेमिया) पाई गई थी, जिसके लिए उन्हें लिपिड-लोअरिंग दवाओं की खुराक शुरू कर सुरक्षित घर भेज दिया गया है। फिजियोथेरेपी टीम ने परिजनों को घर पर की जाने वाली जरूरी कसरतों का प्रशिक्षण भी दिया।
​इस बड़ी कामयाबी पर चिकित्सा महाविद्यालय के उप प्राचार्य डॉ. अरुण सिंह ने आम जनता को जागरूक करते हुए बताया कि ब्रेन हेमरेज जैसी स्थिति में समय की एक-एक सेकंड बेहद कीमती होती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति में अचानक संतुलन बिगड़ना, नजर कमजोर होना, चेहरे का टेढ़ा होना, हाथ-पैरों में कमजोरी या बोलने में तकलीफ (B.E. F.A.S.T.) के लक्षण दिखाई दें, तो बिना एक पल गंवाए उसे सीटी स्कैन और आईसीयू की सुविधा वाले उच्च स्तरीय अस्पताल ले जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि लंबे समय तक अनियंत्रित ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और बिना डॉक्टर की सलाह के खून पतला करने वाली दवाएं खाना ब्रेन हेमरेज के मुख्य कारण हैं, जिनसे नियमित जांच और संतुलित आहार के जरिए ही बचा जा सकता है।

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