फिरोजाबाद। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जनपद में न्यायालय के आदेशों की अवहेलना करने वाले और फरार चल रहे अपराधियों के खिलाफ पुलिस प्रशासन ने एक बड़ा और व्यापक विधिक अभियान चलाया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) फिरोजाबाद के कुशल एवं कड़े निर्देशन में रविवार को संपूर्ण जिले में एक साथ विशेष कॉम्बिंग और दबिश अभियान प्रारंभ किया गया। इस एकीकृत विधिक कार्रवाई के तहत जिला पुलिस ने अद्वितीय तत्परता दिखाते हुए महज 5 घंटे के भीतर विभिन्न गंभीर मुकदमों में वांछित चल रहे 56 एनबीडब्ल्यू (गैर-जमानती वारंट) वारंटियों को गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है। इस ताबड़तोड़ पुलिसिया कार्रवाई से अपराधियों और उनके संरक्षकों में हड़कंप व्याप्त है।

सभी थानों की पुलिस ने एक साथ दी दबिश, नारखी पुलिस ने पकड़े सबसे ज्यादा वारंटी
प्राप्त प्रामाणिक और विधिक जानकारी के अनुसार, माननीय न्यायालय द्वारा जारी किए गए गैर-जमानती वारंटों के तामीला हेतु एसएसपी द्वारा सभी क्षेत्राधिकारियों और थाना प्रभारियों को स्पष्ट व कड़े विधिक दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। रणनीति के तहत जिले के सभी थाना क्षेत्रों में पुलिस की विशेष टीमों ने देर रात और तड़के संदिग्ध ठिकानों पर एक साथ दबिश देना शुरू किया। विधिक आंकड़ों के मुताबिक, इस महा-अभियान के दौरान सबसे उत्कृष्ट प्रदर्शन थाना नारखी पुलिस का रहा, जिसने मुस्तैदी दिखाते हुए अपने क्षेत्र से सबसे अधिक 10 एनबीडब्ल्यू वारंटियों को घेराबंदी कर दबोच लिया। इसके अतिरिक्त अन्य थानों की पुलिस ने भी दर्जनों वांछितों को हिरासत में लिया।

कानून-व्यवस्था सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आगे भी जारी रहेगी विधिक कार्रवाई
फिरोजाबाद पुलिस के वरिष्ठ विधिक अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तार किए गए सभी 56 अभियुक्त विभिन्न दीवानी और फौजदारी मुकदमों में न्यायालय के समक्ष नियत तिथियों पर उपस्थित न होने के कारण विधिक रूप से वांछित चल रहे थे और उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी थे। पुलिस टीमों द्वारा सभी गिरफ्तार आरोपियों की आवश्यक विधिक और चिकित्सीय (मेडिकल) औपचारिकताएं तेजी से पूर्ण की जा रही हैं, जिसके पश्चात सोमवार को उन्हें माननीय संबंधित न्यायालयों के समक्ष प्रस्तुत कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा जाएगा। एसएसपी कार्यालय द्वारा स्पष्ट किया गया है कि जनपद में कानून का राज स्थापित करने और न्यायिक प्रक्रियाओं को सुचारू रखने के लिए वारंटियों और वांछित अपराधियों के खिलाफ इस प्रकार का शून्य-सहनशीलता (जीरो-टॉलरेंस) अभियान भविष्य में भी निरंतर विधिक रूप से संचालित किया जाता रहेगा।


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