लखनऊ। उत्तर प्रदेश में रविवार को आयोजित किए जा रहे ‘महावृक्षारोपण 2026’ महाभियान के अंतर्गत राज्य सरकार एक नया वैश्विक कीर्तिमान स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। राजधानी लखनऊ स्थित वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के मुख्य नियंत्रण कक्ष (कंट्रोल रूम) से प्राप्त आधिकारिक और प्रामाणिक विधिक आंकड़ों के अनुसार, रविवार दोपहर 3:00 बजे तक संपूर्ण उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों में सामूहिक सहभागिता के माध्यम से कुल 25 करोड़ से अधिक पौधे रोपित किए जा चुके हैं। शासन द्वारा निर्धारित किए गए 35 करोड़ पौधों के विशाल व ऐतिहासिक महा-लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शाम 6:00 बजे तक प्रदेश भर में रोपण का यह महायज्ञ निरंतर सुचारू रूप से जारी रहेगा।
‘एक पेड़ मां के नाम’ थीम के तहत जन-आंदोलन में बदला अभियान
प्राप्त विधिक और धरातलीय जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैश्विक आह्वान पर संचालित ‘एक पेड़ मां के नाम’ थीम के अंतर्गत इस वृक्षारोपण महाकुंभ को जन-आंदोलन का रूप दिया गया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा गोरखपुर से इस अभियान की विधिक शुरुआत किए जाने के बाद से ही सूबे के सभी 75 जिलों में अभूतपूर्व सांगठनिक और प्रशासनिक उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रत्येक ग्राम पंचायत, न्याय पंचायत, स्कूल, कॉलेज, औद्योगिक परिसरों और नदियों के कछार क्षेत्रों में पारंपरिक व औषधीय महत्व के पौधों का रोपण युद्धस्तर पर किया जा रहा है। जिला स्तर पर तैनात नोडल अधिकारियों और वन संरक्षकों द्वारा पल-पल की प्रगति रिपोर्ट शासन को भेजी जा रही है।
शाम 6 बजे तक पूर्ण होगा 35 करोड़ का विधिक लक्ष्य, डिजिटल ट्रैकिंग मुस्तैद
मुख्य सचिव और वन विभाग के उच्चाधिकारियों ने संयुक्त बुलेटिन जारी करते हुए बताया कि रोपण की गति को देखते हुए यह पूर्ण विधिक विश्वास है कि शाम 6:00 बजे की समय-सीमा समाप्त होने तक 35 करोड़ पौधों के रोपण का महा-संकल्प पूरी तरह से सिद्ध हो जाएगा। लगाए जा रहे सभी पौधों की उत्तरजीविता (Survival Rate) को सुनिश्चित करने के लिए वन विभाग द्वारा जियो-टैगिंग (Geo-Tagging) की विधिक प्रक्रिया को भी साथ-साथ क्रियान्वित किया जा रहा है। इसके तहत पौधों के स्थान, प्रजाति और रोपण करने वाले विभाग का डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है, ताकि आगामी वर्षों में भी इन पौधों की विधिक रूप से मॉनिटरिंग और सुरक्षा की जा सके। इस महाभियान से उत्तर प्रदेश के हरित आवरण को एक नई व ऐतिहासिक मजबूती मिलना पूरी तरह विधिक रूप से तय माना जा रहा है।