बदायूँ। उत्तर प्रदेश के बदायूँ जनपद अंतर्गत उझानी कस्बा क्षेत्र में सांप्रदायिक सौहार्द और मानवीय संवेदनाओं को जीवंत करने वाली एक बेहद खूबसूरत और ऐतिहासिक घटना सामने आई है। यहाँ मज़हबी और सामाजिक बेड़ियों को तोड़ते हुए एक मुस्लिम युवक रियासत अली ने अनाथ हो चुकी हिंदू युवती दीपांशी का सगे भाई की तरह पूर्ण विधिक व पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ कन्यादान किया। इस अनूठे विवाह आयोजन ने संपूर्ण क्षेत्र में गंगा-जमुनी तहज़ीब की एक नई और अनुकरणीय मिसाल पेश की है, जिसकी सराहना हर वर्ग के लोग मुक्त कंठ से कर रहे हैं।

माता-पिता के निधन के बाद बने सहारा, निभाई सगे भाई की भूमिका
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उझानी क्षेत्र की रहने वाली दीपांशी के सिर से कुछ समय पूर्व माता-पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया था। माता-पिता के असमय निधन के बाद दीपांशी के सामने जीवन यापन और भविष्य को लेकर गहरा संकट खड़ा हो गया था। ऐसी विकट और बेसहारा परिस्थिति में पड़ोस में रहने वाले रियासत अली ने इंसानियत का हाथ आगे बढ़ाया। उन्होंने दीपांशी को अपनी सगी बहन का दर्जा दिया और उसके भरण-पोषण से लेकर विवाह योग्य होने तक की संपूर्ण सामाजिक और घरेलू ज़िम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा के साथ एक आदर्श भाई के रूप में किया।

पूर्ण वैदिक रीति-रिवाजों और मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ विवाह समारोह
दीपांशी के विवाह योग्य होने पर रियासत अली ने उसके लिए एक सुयोग्य वर की तलाश की और पूरे सम्मान के साथ शादी तय की। गुरुवार को आयोजित हुए इस विवाह समारोह की सबसे विशेष बात यह रही कि रियासत अली ने मज़हब की दीवारों को दरकिनार करते हुए पूर्ण रूप से हिंदू सनातन धर्म के वैदिक रीति-रिवाजों, सात फेरों और मंत्रोच्चार के बीच शादी की सभी रस्में पूरी कराईं। विवाह मंडप में बैठकर रियासत अली ने मुख्य यजमान के रूप में दीपांशी का विधिवत कन्यादान किया और विदाई के समय एक सगे भाई की तरह उपहार व आशीर्वाद देकर अपनी बहन को विदा किया। इस भावुक कर देने वाले पल को देखकर विवाह समारोह में उपस्थित हर हिंदू और मुस्लिम समाज के नागरिक की आंखें नम हो गईं। स्थानीय प्रबुद्ध जनों ने इस विवाह को समाज के लिए एक सकारात्मक और प्रेरणादायक संदेश बताया है।


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