गोंडा। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से राशन वितरण प्रणाली से जुड़ी एक बेहद बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। जिले में मात्र दो महीनों के भीतर हजारों पात्र परिवारों के राशन कार्ड निरस्त किए जाने के मामले को शासन ने बेहद गंभीरता से लिया है। गोंडा के जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) के खिलाफ शासन स्तर से उच्च स्तरीय जांच बैठा दी गई है। इस महाघोटाले और गड़बड़ी की परतें खोलने के लिए उत्तर प्रदेश के 10 अलग-अलग जिलों की संयुक्त जांच टीम गोंडा पहुंच चुकी है, जिससे पूरे महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।

इस हाई-प्रोफाइल जांच और मामले से जुड़े मुख्य विवरण नीचे दिए गए हैं:

मात्र दो महीने में काटे गए 7,340 नाम, शासन ने उठाए सवाल

  • अचानक काटे गए नाम: शासन को शिकायत मिली थी कि गोंडा जिले में बीते साल सितंबर से नवंबर (दो महीने के भीतर) के बीच अचानक बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए कुल 7,340 राशन कार्डधारकों के नाम सूची से काट दिए गए।
  • जवाब तलब: इतनी बड़ी संख्या में बिना किसी ठोस पारदर्शी प्रक्रिया के अचानक नाम काटे जाने पर लखनऊ मुख्यालय से लेकर शासन तक के आला अधिकारियों के कान खड़े हो गए। शासन ने सख्त रुख अपनाते हुए सवाल उठाया है कि आखिर महज दो महीने के संक्षिप्त समय में इतने सारे कार्डधारकों को अपात्र घोषित कर उनका नाम किस आधार पर काटा गया?

खाद्य उपायुक्त के नेतृत्व में 10 जिलों की टीम कर रही है कैंप

  • कुंवर दिनेश प्रताप कर रहे हैं अगुवाई: इस व्यापक जांच की कमान खाद्य उपायुक्त दफ्तर में तैनात वरिष्ठ अधिकारी कुंवर दिनेश प्रताप को सौंपी गई है।
  • 10 जिलों की फोर्स मुस्तैद: मामले की निष्पक्ष और गहन जांच सुनिश्चित करने के लिए शासन ने 10 अलग-अलग जिलों के काबिल पूर्ति अधिकारियों और निरीक्षकों की एक संयुक्त विशेष टीम तैयार की है, जो इस वक्त गोंडा में डेरा डाले हुए है।

जिले भर के सप्लाई इंस्पेक्टरों से कड़ी पूछताछ जारी

  • फाइलें खंगाल रही है टीम: जांच टीम इस समय गोंडा के खाद्य उपायुक्त और जिला पूर्ति कार्यालय के रिकॉर्ड रूम में मौजूद सभी फाइलों, ऑनलाइन लॉग्स और दस्तावेजों की बारिकी से स्क्रूटनी कर रही है।
  • सप्लाई इंस्पेक्टरों पर शिकंजा: जिले भर के तमाम क्षेत्रों में तैनात क्षेत्रीय खाद्य अधिकारियों और सप्लाई इंस्पेक्टरों (पूर्ति निरीक्षकों) को तलब किया गया है। जांच टीम उनसे आमने-सामने बिठाकर कड़ी पूछताछ कर रही है कि उन्होंने किन रिपोर्ट्स और भौतिक सत्यापन के आधार पर इन 7,340 गरीबों के नाम सूची से हटाए।

इस व्यापक जांच से स्पष्ट है कि यदि किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या जानबूझकर पात्रों को योजना से वंचित करने की बात सामने आती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ निलंबन और विभागीय मुकदमों समेत बेहद सख्त दंडात्मक कार्रवाई होना तय है।


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