विधि संवाददाता, पीलीभीत। थाना हजारा क्षेत्र में पांच वर्ष पूर्व एक मासूम बालक के साथ कुकर्म करने के गंभीर मामले में न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश/पॉक्सो एक्ट त्रिभुवन नाथ पासवान ने मामले की अंतिम सुनवाई के बाद आरोपित को दोषी पाते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही न्यायालय ने दोषी पर 40 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि अर्थदंड की धनराशि जमा होने पर उसकी आधी राशि (20 हजार रुपये) पीड़ित बालक को सहायता के रूप में दी जाएगी।
​ अभियोजन कथानक के अनुसार, हजारा थाना क्षेत्र के एक गांव के निवासी ने 16 जून 2021 को थाने में लिखित तहरीर देकर न्याय की गुहार लगाई थी। वादी का कहना था कि उसका छह वर्षीय पुत्र अचानक बेहद डरा-सहमा रहने लगा था। जब परिजनों ने प्यार से उससे पूछताछ की, तो मासूम ने बताया कि 7 जून 2021 की सुबह करीब 10 बजे गांव के ही भूपेंद्र सिंह उर्फ पप्पू और सरवन सिंह उसे बहला-फुसलाकर पास के जंगल में ले गए थे, जहाँ उन्होंने उसके साथ कुकर्म जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। वारदात के बाद से बच्चे की तबीयत लगातार खराब चल रही थी, जिसके बाद पीड़ित को लेकर परिजन थाने पहुंचे।
​ पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल रिपोर्ट दर्ज की और मामले की तफ्तीश शुरू की। विवेचना के दौरान पुलिस ने भूपेंद्र सिंह उर्फ पप्पू को घटना का मुख्य दोषी पाते हुए उसके खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया। न्यायालय में चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक कुश कुमार वर्मा ने मामले को मजबूती से रखा। उन्होंने पीड़ित बालक और वादी मुकदमा सहित कई अहम गवाहों को अदालत में पेश कर उनके बयान दर्ज कराए। दूसरी ओर, आरोपित ने खुद को निर्दोष बताते हुए आरोपों को झूठा बताया। अंततः, माननीय न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने, गवाहों के बयानों और पत्रावली पर उपलब्ध वैज्ञानिक व साक्ष्यों का गहन अवलोकन करने के बाद भूपेंद्र सिंह उर्फ पप्पू को पॉक्सो एक्ट के तहत दोषी करार देते हुए सजा मुकर्रर की।

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