पीलीभीत। भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात 49वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (SSB) पीलीभीत की ई समवाय (कंपनी) नागोरिया कट द्वारा सीमा सुरक्षा के साथ-साथ आपदा प्रबंधन की तैयारियों को और अधिक सुदृढ़ एवं असरदार बनाने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाया गया है. एसएसबी कमांडेंट के विशेष दिशा-निर्देशों के क्रम में जवानों ने सीमा क्षेत्र से होकर गुजरने वाली और मानसून के दौरान उफान पर रहने वाली शारदा नदी के गहरे जलस्तर में एक सफलतापूर्वक ‘वॉटर रेस्क्यू मॉक ड्रिल’ का आयोजन किया. वाहिनी की विशेष रूप से प्रशिक्षित रैपिड रिस्पांस टीम (RRT) द्वारा आयोजित इस रणनीतिक अभ्यास का मुख्य उद्देश्य वर्षाकाल में सीमावर्ती तटीय गांवों में आने वाली संभावित बाढ़ अथवा किसी भी अप्रत्याशित जल-आपदा के समय बेहद कम समय के भीतर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर स्थानीय नागरिकों की जीवन रक्षा सुनिश्चित करना है.

इस उच्च स्तरीय मॉक ड्रिल के दौरान एसएसबी के जांबाज सुरक्षाकर्मियों ने वैश्विक मानकों के अत्याधुनिक जीवन रक्षक उपकरणों की तकनीकी कार्यप्रणाली का शानदार प्रदर्शन किया. अभ्यास के तहत जब नदी की तेज लहरों के बीच एक व्यक्ति के डूबने की स्थिति उत्पन्न की गई, तो मुस्तैद सुरक्षा दल ने तत्काल एक्शन लेते हुए ‘लाइफ बॉय’ और अत्याधुनिक मोटर चालित रेस्क्यू बोट की सहायता से अत्यंत विषम परिस्थितियों में भी डूबते हुए व्यक्ति को बहुत कम समय के भीतर सुरक्षित जलधारा से बाहर निकाल लिया. पानी से सकुशल बाहर निकालने के उपरांत त्वरित आपातकालीन चिकित्सा सहायता के तहत घायल अथवा अचेत व्यक्ति को तत्काल स्ट्रेचर के माध्यम से नदी किनारे बनाए गए सुरक्षित मेडिकल बेस कैंप तक पहुँचाया गया, जहां चिकित्सा विंग ने अपनी मुस्तैदी का परिचय दिया.

मेडिकल बेस कैंप में एसएसबी के प्रशिक्षित जवानों द्वारा अचेत पीड़ित को पुनर्जीवित करने के लिए चिकित्सा विज्ञान की जीवन रक्षक प्रणाली सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) देने तथा उसे प्राथमिक उपचार (First Aid) प्रदान करने की पूरी वैज्ञानिक प्रक्रिया का सफलतापूर्वक और त्रुटिहीन प्रदर्शन किया गया. भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सुरक्षा चौकियों के प्रभारियों ने बताया कि इस प्रकार के व्यावहारिक अभ्यासों से न केवल बल के भीतर किसी भी प्राकृतिक विभीषिका से निपटने की क्षमता और आत्मविश्वास कई गुना बढ़ जाता है, बल्कि संकट के समय स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन और सीमावर्ती नागरिकों के साथ समन्वय स्थापित करने में भी बड़ी मदद मिलती है, ताकि विपरीत परिस्थितियों में जनहानि को पूरी तरह शून्य किया जा सके.


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