रूद्रपुर। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति के आदेशनुसार अपराध कर फरार आरोपियों पर पुलिस ने कसा शिकंजा,ढोल नगाड़ों संग फरार अपराधियों के घर पहुँची पुलिस ने मा0 न्यायालय के आदेश पर आरोपियों की संपत्ति कुर्की उद्घोषणा की गई। कोतवाल रुद्रपुर प्रकाश दानू द्वारा फरार चल रहे अपराधियों की गिरफ्तारी व कुर्की की कार्यवाही करने हेतु थाना रुद्रपुर से टीमें गठित की गई।उक्त क्रम में चैकी रम्पुरा क्षेत्र से मा0न्यायायल से फरार चल रहे चोरी,मारपीट,जुआरी आदि अपराधियों को घरो पर जाकर ताबडतोड दबिश दी तो अभियुक्तगण फरार मिले, इन अभियुक्तगणों सुरेश कोरी पुत्र छोटे लाल कोरी निवासी वार्ड नं0 22 रम्पुरा थाना रुद्रपुर, मुन्तियाज पुत्र मुख्तयार निवासी पहाडगंज थाना रुद्रपुर एंव भूरा पुत्र नजाकत निवासी वार्ड नं0 18 खेडा थाना रुद्रपुर के घरों व संपत्ति की कुर्की करने के क्रम में तीनों अपराधियों के घर व सार्वजनिक स्थानों पर ढोल बजाकर व मुनादी कराकर कुर्की उद्घोषणा की कार्यवाही की गई कि इन अभियक्तों के लगातार फरार रहने पर इनकी संपत्तियों को जब्त कर लिया जाएगा आपरेशन प्रहार की इस कार्यवाही से अपराधियों व उनके परिचितो में हडकंप मच गया है।पुलिस टीम में प्रभारी निरीक्षक कोतवाली रुद्रपुर प्रकाश दानू,चैकी प्रभारी रम्पुरा पंकज कुमार,चैकी प्रभारी बाजार प्रदीप कुमार,एसआई धीरज टम्टा,हे0का0 राजकुमार,का0विजय दरमाल व का0जगदीश पाठक कोतवाली रुद्रपुर शामिल रहे।

मृत व्यक्ति के नाम पर कार्रवाई से उठे सवाल

रुद्रपुर। रम्पुरा पुलिस की एक कार्रवाई इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पुलिस ने न्यायालय के आदेश के तहत फरार आरोपियों के खिलाफ चलाए गए अभियान के दौरान एक ऐसे व्यक्ति भूरा पुत्र नजाकत के घर भी कुर्की उद्घोषणा की कार्रवाई कर दी जिसकी वर्ष 2021 में ही मृत्यु हो चुकी है।बताया जा रहा है कि पुलिस टीम ढोल-नगाड़ों के साथ संबंधित व्यक्ति के घर पहुंची और कुर्की की मुनादी कराई। मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों ने जब पुलिस को बताया कि संबंधित व्यक्ति की मौत करीब पांच वर्ष पहले हो चुकी है तो कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े हो गए।स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भूरा पुत्र नजाकत का निधन वर्ष 2021 में हो चुका था और उसके परिवार वाले घर बेचकर भी यहां से चले गए तो उसके नाम पर कुर्की उद्घोषणा की कार्रवाई कैसे की गई, मामले ने पुलिस के रिकॉर्ड सत्यापन और जांच प्रक्रिया पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। अब लोगों की नजर पुलिस अधिकारियों की प्रतिक्रिया पर टिकी है यदि मामले में तथ्य सही पाए जाते हैं तो यह प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर मामला माना जा सकता है।

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