पीलीभीत। प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा के नेतृत्व में स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालय, पीलीभीत का अत्याधुनिक गहन चिकित्सा कक्ष (आईसीयू) जटिल और मल्टी-ऑर्गन रोगियों के सफल उपचार में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। इसी क्रम में, आईसीयू टीम ने मस्तिष्काघात (ब्रेन स्ट्रोक), दोनों गुर्दों के गंभीर संक्रमण और फेफड़ों के संक्रमण जैसी एक साथ कई गंभीर समस्याओं से जूझ रहे 70 वर्षीय मरीज का सफल उपचार किया है। मरीज को अचेत अवस्था और परिवर्तित चेतना के साथ भर्ती कराया गया था, जिसे अब पूर्णतः स्वस्थ कर अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।
आईसीयू प्रभारी डॉ. अरविंद एम के नेतृत्व में चिकित्सकों की टीम ने मरीज की तत्काल गहन जांच और उपचार शुरू किया था। जांच में मरीज के मस्तिष्क में तीव्र लैक्यूनर ब्रेन स्ट्रोक, पुराने स्ट्रोक के चिन्ह और क्रॉनिक माइक्रोएंजियोपैथिक इस्केमिक परिवर्तन पाए गए, जो छोटी रक्त वाहिकाओं की दीर्घकालिक बीमारी का संकेत हैं। सीटी स्कैन से दोनों गुर्दों में गंभीर संक्रमण (बाइलेटरल एक्यूट पायलोनेफ्राइटिस) की पुष्टि हुई। साथ ही, फेफड़ों की एचआरसीटी जांच में कुछ ऐसे नोड्यूल भी दिखाई दिए, जिनके कैंसरजन्य होने की संभावना को देखते हुए परिजनों को उच्च केंद्र पर ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञ से परामर्श की सलाह दी गई है। आईसीयू टीम ने तत्काल कल्चर-सेंसिटिव अंतःशिरा (आईवी) एंटीबायोटिक उपचार प्रारम्भ किया और ब्रेन स्ट्रोक के लिए मानक प्रोटोकॉल अपनाकर मस्तिष्क को अतिरिक्त क्षति से बचाया।
सेरिबेलर स्ट्रोक के कारण मरीज को संतुलन बनाने और चलने में गंभीर कठिनाई आ गई थी। इसके समाधान के लिए आईसीयू टीम ने शुरुआती चरण से ही फिजियोथेरेपी को उपचार का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया। फिजियोथेरेपिस्ट आकाश के मार्गदर्शन में नियमित पुनर्वास अभ्यासों के माध्यम से मरीज ने चलने की क्षमता पुनः प्राप्त की और वह अपने पैरों पर चलकर अस्पताल से डिस्चार्ज हुआ। डिस्चार्ज के समय भविष्य में स्ट्रोक की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक दवाएं दी गईं और परिजनों को कम नमक वाले संतुलित आहार, रक्तचाप नियंत्रण तथा नियमित फॉलो-अप बनाए रखने का परामर्श दिया गया।
इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. संगीता अनेजा ने कहा कि संस्थान का उद्देश्य जनपदवासियों को स्थानीय स्तर पर तृतीयक स्तर की अत्याधुनिक गहन चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराना है। इतने जटिल रोगी का सफल उपचार संस्थान की उन्नत व्यवस्था और समर्पित टीम की दक्षता का प्रमाण है। महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी प्रो. डॉ. अरुण सिंह ने त्वरित निदान, वैज्ञानिक उपचार और फिजियोथेरेपी के समन्वित टीमवर्क की सराहना की। वहीं, डॉ. अरविंद एम ने आमजन से अपील की कि अचानक बोलने में कठिनाई, शरीर के एक भाग में कमजोरी या संतुलन बिगड़ने जैसे स्ट्रोक के लक्षण दिखने पर बिना विलंब मरीज को निकटतम अस्पताल पहुंचाएं, क्योंकि समय पर मिला उपचार ही जीवन बचा सकता है।
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