मुजफ्फरनगर। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के मंडी क्षेत्र में स्थित एक पेपर प्लेट निर्माण कारखाने में कथित बंधुआ मजदूरी और श्रमिकों के शोषण के मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कारखाने में कई मजदूरों को लगभग डेढ़ साल तक कम मजदूरी या बिना मजदूरी के, अपर्याप्त भोजन के साथ और देर रात तक जबरन काम करने के लिए मजबूर किया गया। बताया गया कि एक मजदूर किसी तरह वहां से भागने में सफल रहा, जिसके बाद उसने तितावी थाने में शिकायत दर्ज कराई और इसके आधार पर अन्य मजदूरों को भी रेस्क्यू किया गया।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जांच के दौरान कई मजदूरों के शरीर पर चोटों के निशान मिले हैं, जिनमें खरोंच, घाव और हड्डियों में फ्रैक्चर जैसी गंभीर चोटें शामिल हैं। कुछ मजदूरों में लंबे समय तक शारीरिक शोषण के संकेत भी पाए गए हैं।

सूत्रों के अनुसार, इस मामले में एक व्यक्ति की मौत की भी पुष्टि हुई है, जबकि अन्य मौतों की आशंका को लेकर जांच जारी है।

NHRC ने पाया कि यदि ये आरोप सत्य हैं, तो यह मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन का मामला है। आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

इसके साथ ही, मुजफ्फरनगर के जिला मजिस्ट्रेट को श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की एसओपी तथा बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम, 1976 के तहत जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने श्रमिकों के ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकरण की प्रक्रिया भी तत्काल सुनिश्चित करने को कहा है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा, छत्तीसगढ़, झारखंड सहित कई राज्यों और नेपाल से भी थे। आरोप है कि उन्हें रोजगार, वेतन और सुविधा का झांसा देकर लाया गया था, लेकिन बाद में उनके मोबाइल फोन और पहचान पत्र जब्त कर लिए गए, जिससे वे बाहरी दुनिया से संपर्क नहीं कर सके।

यह भी आरोप है कि मजदूरों को डराने और भागने से रोकने के लिए पिटबुल कुत्तों का इस्तेमाल किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है।

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