विधि संवाददाता, पीलीभीत। फर्जी बैंक रसीद तैयार कर 15 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोपी आयुष्मान भारत कार्यक्रम के संविदाकर्मी अरुण कुमार मौर्य की नियमित जमानत अर्जी अदालत ने खारिज कर दी है। अपर सत्र न्यायाधीश विजय कुमार हिमांशु ने मामले की गंभीरता को देखते हुए और प्रथम दृष्टया जालसाजी व धोखाधड़ी के आरोपों को गंभीर मानते हुए आरोपी को राहत देने से साफ इनकार कर दिया। न्यायालय ने अपने आदेश में माना कि आरोपी के विरुद्ध धोखाधड़ी और जाली दस्तावेज तैयार करने के पर्याप्त आधार मौजूद हैं, और ऐसे में उसे जमानत देने पर साक्ष्यों को प्रभावित किए जाने की पूरी आशंका है।
अभियोजन पक्ष से मिली जानकारी के अनुसार, थाना सुनगढ़ी क्षेत्र के निवासी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय में सहायक शोध अधिकारी के पद पर तैनात पीयूष कुमार सिंह ने इस संबंध में मामला दर्ज कराया था। उनका आरोप था कि आयुष्मान भारत कार्यक्रम में तैनात आयुष्मान मैनेजर अरुण कुमार मौर्य ने अपनी पारिवारिक परेशानियों का हवाला देकर उनसे अलग-अलग समय पर ऑनलाइन माध्यम से कुल 15 लाख रुपये उधार लिए थे। कुछ रकम वापस करने के बाद भी आरोपी पर 7.47 लाख रुपये बकाया रह गए थे। जब पीड़ित ने अपने बकाया रुपये वापस मांगे, तो आरोपी और उसके परिजनों ने उन्हें जान से मारने की धमकी दी। इतना ही नहीं, आरोपी ने पीड़ित को कृष्णा लोक कॉलोनी में एक प्लॉट दिलाने का झांसा भी दिया और बाद में जो बैंक जमा रसीदें सौंपीं, वे जांच में पूरी तरह फर्जी पाई गईं।
जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि यह पूरा मामला एक कारोबारी विवाद का है और दोनों पक्षों के बीच लेनदेन आपसी सहमति से हुआ था। इसके विपरीत, अभियोजन पक्ष ने बैंक प्रबंधक के बयानों और विवेचना के दौरान एकत्र किए गए पुख्ता साक्ष्यों को अदालत के सामने रखा। जांच में यह साबित हुआ कि आरोपी ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की फर्जी मोहर का इस्तेमाल कर जाली जमा पर्ची तैयार की थी, जबकि बैंक के आधिकारिक रिकॉर्ड में ऐसी किसी भी जमा राशि की कोई एंट्री नहीं मिली। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का गहन अवलोकन करने के बाद आरोपी अरुण कुमार मौर्य की जमानत याचिका को पूरी तरह से निरस्त कर दिया।