विधि संवाददाता, पीलीभीत। जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के मामले में विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश (SC/ST एक्ट) रामकिशोर ने मामले की सुनवाई करते हुए आरोपी के विरुद्ध अपराध सिद्ध न होने पर उसे दोषमुक्त (बरी) कर दिया है। इसके साथ ही, अदालत में झूठी गवाही (मिथ्या साक्ष्य) देने पर कड़ा रुख अपनाते हुए न्यायालय ने वादी मुकदमा के खिलाफ अलग से प्रकीर्ण वाद (Miscellaneous Case) दर्ज कर नोटिस जारी करने का आदेश दिया है।
अभियोजन पक्ष की कहानी के अनुसार, थाना बिलसंडा क्षेत्र के मोहल्ला आदर्श नगर निवासी छोटू ने वर्ष 2024 में एक रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि वह बिलसंडा के मुख्य बाजार में स्थित आनंद वर्मा रेडीमेड की दुकान पर काम करता है। 1 दिसंबर 2024 की शाम करीब छह बजे जब वह पानी लेकर दुकान पर वापस आ रहा था, तभी मोहल्ला घससूगंज (बिलसंडा) के अनुज गुप्ता और अरविंद ने उसके साथ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया। आरोप था कि उन्होंने छोटू के साथ मारपीट की और जान से मारने की धमकी देकर वहां से भगा दिया। पुलिस ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना की और अनुज गुप्ता को दोषी पाते हुए उसके खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था।
विशेष अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान उस वक्त नया मोड़ आ गया, जब खुद वादी छोटू उर्फ नीरज न्यायालय के समक्ष अपनी ही दर्ज कराई गई कहानी से पलट गया। उसने अदालत में ऐसी किसी भी घटना के होने से साफ इनकार कर दिया। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों का गहनता से अवलोकन करने के बाद पाया कि आरोपी अनुज गुप्ता के खिलाफ दोष साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है, जिसके आधार पर उसे साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया गया। वहीं, अदालत का समय बर्बाद करने और न्याय प्रक्रिया को गुमराह कर झूठी गवाही देने के मामले में कोर्ट ने वादी छोटू उर्फ नीरज के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने का आदेश जारी किया है।