विधि संवाददाता,​ पीलीभीत। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जनपद में अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) अनु सक्सेना की अदालत ने चोरी और गैंगस्टर एक्ट के एक पुराने मामले में कड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने मामले के मुख्य आरोपित शिवाकांत को दोषी करार देते हुए दो वर्ष के कारावास और सात हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। इस मामले के एक अन्य सह-आरोपित पवित्र की मुकदमा विचारण (सुनवाई) के दौरान ही मृत्यु हो चुकी है। अभियोजन पक्ष की ओर से इस हाई-प्रोफाइल मामले में विशेष लोक अभियोजक अमित कुमार शुक्ल ने प्रभावी पैरवी की और न्यायालय के समक्ष कई महत्वपूर्ण गवाह पेश किए।
​मामले के अनुसार, थाना न्यूरिया क्षेत्र के ग्राम टोडरपुर निवासी मोहम्मद अहमद ने 29 नवंबर 2008 को न्यूरिया थाने में एक लिखित तहरीर दी थी। वादी मोहम्मद अहमद बैंक ऑफ बड़ौदा की मझोला शाखा से 1 लाख 5 हजार रुपये निकालकर एक थैले में रखकर ले जा रहे थे। डियूनीडाम रोड पर जब वह सलीम साइकिल वाले की दुकान पर पैडल लेने के लिए रुके और थैला साइकिल पर ही टंगा छोड़ दिया, तभी घात लगाए बैठे दो उच्चकों ने थैले से रुपये निकाल लिए। पास ही मौजूद एक सरदार जी द्वारा शोर मचाने पर वादी ने देखा कि दो लोग रुपये लेकर भाग रहे हैं। जांच करने पर थैले में से 10 हजार रुपये कम पाए गए थे।
​पुलिस ने इस वारदात की रिपोर्ट दर्ज कर जब गहन विवेचना की, तो इसमें एक संगठित गिरोह का हाथ होना पाया गया। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत भी कार्रवाई की और थाना कोतवाली हरदोई के ग्राम सुरजीपुर निवासी शिवाकांत व पवित्र के विरुद्ध न्यायालय में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया। सुनवाई के दौरान हालांकि आरोपित शिवाकांत ने खुद को निर्दोष बताया, लेकिन विशेष लोक अभियोजक द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर जुर्म साबित हो गया। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पत्रावली का बारीकी से अवलोकन करने के बाद शिवाकांत को मुकम्मल तौर पर दोषी पाते हुए सजा मुकर्रर कर दी।

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