लखनऊ। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने एक बेहद महत्वपूर्ण और मानवीय फैसला सुनाते हुए ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाने वाले उत्तर प्रदेश पुलिस के एक हेड कांस्टेबल को ‘कोरोना वॉरियर’ (Corona Warrior) माना है। हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ा निर्देश देते हुए मृतक हेड कांस्टेबल की पत्नी को 50 लाख रुपये की अनुग्रह राशि (मुआवजा) का भुगतान करने का आदेश जारी किया है। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि महामारी के दौर में फ्रंटलाइन पर काम करने वाले पुलिसकर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर समाज की रक्षा कर रहे थे, ऐसे में उन्हें इस श्रेणी के लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता।

यह ऐतिहासिक फैसला माननीय न्यायालय ने मृतक हेड कांस्टेबल बलवंत प्रताप की पत्नी सेम्मा भारती द्वारा दायर की गई रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए लिया है। मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, उत्तर प्रदेश पुलिस में हेड कांस्टेबल के पद पर तैनात बलवंत प्रताप की ड्यूटी के दौरान कोरोना वायरस की चपेट में आने (कोविड संक्रमण) से असमय मौत हो गई थी। पति के निधन के बाद उनकी पत्नी सेम्मा भारती सरकार द्वारा घोषित 50 लाख रुपये की अनुग्रह राशि पाने के लिए लगातार कानूनी लड़ाई लड़ रही थीं। हाई कोर्ट ने याचिका पर मौजूद सभी साक्ष्यों और परिस्थितियों का बारीकी से अवलोकन करने के बाद पीड़िता के पक्ष में फैसला सुनाया और प्रशासन को तय समय सीमा के भीतर मुआवजे की पूरी राशि जारी करने का आदेश दिया।


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